27 दिसंबर 2023 - 05:17
सऊदी अरब यमन के खिलाफ अमेरिकी गठबंधन का हिस्सा क्यों नहीं बना ?

सऊदी युवराज अंसारुल्लाह के साथ 8 साल के युद्ध के बाद इस बात को अच्छी तरह समझ चुके हैं और सऊदी अरब को इसकी बहुत बड़ी कीमत चुकानी भी पड़ी है।

न्यूयॉर्क टाइम्स ने सऊदी अरब और संयुक्त राज्य अमेरिका के सूत्रों के हवाले से एक रिपोर्ट में लिखा है कि सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान बड़ी आर्थिक परियोजनाओं के कारण अंसारुल्लाह के खिलाफ दोबारा किसी संघर्ष का हिस्सा बनने के इच्छुक नहीं हैं। सऊदी युवराज को मालूम है कि अगर सऊदी अरब यमन के खिलाफ फर किसी संघर्ष का हिस्सा बनता है तो वह फिर से अंसारुल्लाह की मिसाइलों के निशाने पर होगा जो रियाज़ या दक्षिणी सऊदी अरब के शहरों में कहीं भी अपने टारगेट को भेदने में सक्षम हैं।

सऊदी युवराज अंसारुल्लाह के साथ 8 साल के युद्ध के बाद इस बात को अच्छी तरह समझ चुके हैं और सऊदी अरब को इसकी बहुत बड़ी कीमत चुकानी भी पड़ी है।

सऊदी युवराज ने टूरिस्ट और निवेशकों को बड़े परिश्रम के बाद इस बात के लिए राज़ी किया है कि वह यहाँ निवेश करें। वह सऊदी को फिर से किसी जंग की दलदल में नहीं धकेलना चाहते। साथ ही बिन सलमान कोशिश कर रहे है कि वह यमन युद्ध और अंसारुल्लाह के सबसे बड़े समर्थक ईरान के साथ अपने विनाशकारी मतभेदों को खत्म कर लें।